Offering flowers of gratitude

On reading the honest and assertive statement, my respect for her grew manifold. Taking responsibility to make these amends was not really required on her part, but this act of accountability and integrity shines like a beacon of hope towards a world that is free of bigotry, dogma, sexism and bias. When she calls it a service, she indicates that it is nothing heroic but something that must be imbibed and offered by all.

On Duty in Times of Corona Lockdown

भाई का कॉलेज बंद है। ऊधम नहीं मचा रहा लेकिन। बाथरूम के लिए भी लड़ नहीं रहा। कहता है, "दीदी आप ही नहा लो पहले, क्या पता अगला स्नान isolation ward में हो।" बैंक जाते समय और घर आते समय मां दहलीज़ पर ही मिलती हैं। पूजा की थाली लिए नहीं, हाथ में spray लिए। … Continue reading On Duty in Times of Corona Lockdown

तत्त्वमसि / Thou Art That.

कभी मौन हो धरा निस्तब्ध निःशब्द , या प्रबल भू-गर्भ से हो प्राकृत तन्द्रा भंग व्योम के निर्वात् में ॐ-स्पन्द हूँ मैं , ब्रह्म -स्फुट की "कृति" पाबन्द प्रति-रोम में है अन्तस में अस्तित्व प्रखर, ढूंढो मुझे; अमर्त्य असीम शाश्वत सत्य, बूझो मुझे ~कृति Earth maybe silent, unmoving, quiet or her natural stupor maybe shaken … Continue reading तत्त्वमसि / Thou Art That.

आत्म – संवाद

19.05.2019 जून 2015 से भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत हूँ | पिछले चार वर्षों में चार राज्यों, दस शाखाओं, और जनता के भावातिरेकों से गहरे साक्षात्कार हुए | प्रत्येक कार्यदिवस पर लगभग दो सौ लोगों से मिलती हूँ | फाइलों में या कंप्यूटर स्क्रीन पर नहीं, व्यक्तिगत रूप से | हर वर्ग, हर जाति , हर … Continue reading आत्म – संवाद